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मुक्तक

धरती पर जब जब बढ़ते रहे हैं , पाप
लेकर अवतार प्रभु करते रहे संहार,

मिलता रहा सदा पापियों को ही शाप,
फिर भी क्यूं न रुकता घातक शब्दों का प्रहार।।

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