Gaurav Jha [WRITER, JOURNALIST & COLUMNIST ] बिहार के मिथिला (Mithila) में एक कहावत काफी मशहूर है- पग-पग पोखरि, माछ-मखान। मिथिला के मखाने अपने स्वाद, पोषक तत्व और प्राकृतिक रूप से उगाए जाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। मिथिला की पावन धरती, जहाँ ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की खुशबू बसती है, वहीं की पहचान है मिथिला मखाना। इसे यूँ ही “तालाबों का सोना” नहीं कहा जाता। सदियों से मखाना मिथिला के किसानों की मेहनत, प्रकृति के वरदान और समृद्ध परंपरा का प्रतीक रहा है।कहा जाता है, मिथिला के तालाबों में सिर्फ पानी नहीं, मेहनत और सपने भी पलते हैं। कांटों से भरे गहरे पानी में उतरकर किसान मखाने के बीज निकालते हैं। यह सिर्फ खेती नहीं, पीढ़ियों से चली आ रही एक विरासत है। हर दाना किसानों की मेहनत और मिथिला की मिट्टी की कहानी कहता है। लिहाज़ा भारत के 90% मखानों का उत्पादन यहीं से होता है। मिथिला का मखाना अपनी गुणवत्ता,स्वादिष्ट पोषक तत्व और औषधीय गुणों के कारण देश और विदेशों मे...
Gaurav Jha is a signature of Kalam who is a litterateur as well as a skilled speaker, leader, stage operator and journalist. His poems, articles, memoirs, story are being published in many newspapers and magazines all over the country. At a very young age, on the basis of his authorship, quality,ability.he has made his different fame and his identity quite different in the country. यह ब्लॉग यात्रा,इतिहास,शिक्षा और साहित्य से जुड़ी रोचक कहानी और जानकारी साझा करता है.....