Skip to main content

ग़ज़ल//कवि गौरव झा

ख़ुद को वो बहुत औरों से होशियार समझता है,
ज़माना है दिलों में जिसके उसे बीमार समझता है।

गुनाह करता सरेआम,ख़ुद को वफादार समझता है,
सर पे ताज पहनकर सबसे वो जमींदार समझता है।

बिक रहा ईमान ज़माने में,सबको वो यार समझता है,
उसकी क़ातिल निगाह ख़ुद को समझदार समझता है।

ताकता है शहर के आईनों में,वो वफादार समझता है,
ज़माना है दिलों में जिसके उसे वो बीमार समझता है।

जख्म खाकर अंधेरों में वो ख़ुद को जानदार समझता है,

अंधेरा मिटाने वाले को वो सरेआम तलबगार समझता है।

ख़ुद को वो बहुत औरों से होशियार समझता है,

ज़माना है दिलों में जिसके उसे बीमार समझता है।


Comments

Popular posts from this blog

जयपुर का गुलाबी रत्न 'हवा महल' : इतिहास,अद्भुत वास्तुकला और पर्यटन का बेजोड़ संगम

                  GAURAV   Jha   ( Writer , Columnist & Journalist ) ---------‐--------------------------‐----------------------------------------- राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं...

सुलभ क्रांति के जनक : पद्म विभूषण डाँ. विंदेश्वर पाठक

  WRITER GAURAV JHA  सुलभ स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार-आंदोलन के जनक कहे जाने वाले पद्म विभूषण से अलंकृत महान व्यक्त्वि डॉ. विन्देश्वर पाठक जी थे। उन्होंने सिर्फ़ महात्मा गाँधी जी के सपने को पूरा नहीं किया। बल्कि स्कैवेंजरों के मानवाधिकार और सम्मान दिलाने के लिए जीवन भर संघर्षरत रहा और अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। अक्सर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी कहा करते थे कि ------------- " शायद मेरा पुनर्जन्म नहीं हो,किंतु यदि ऐसा होता है, तब मेरी इच्छा है कि मेरा जन्म स्कैवेंजरों के परिवार में हो, जिससे मैं सर पर मैला ढ़ोने के अमानवीय, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा घृणित कार्य से उन्हें मुक्ति दिला सकूँ" कहीं न कहीं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. विंदेश्वर पाठक जी महात्मा गाँधी जी के विचारों से प्रभावित थे,और उनके विचारों को सीने में लेकर चला और लाखों स्कैवेंजरों, 'अस्पृश्यों' को मानवाधिकार और सम्मान दिलाने के लिए महात्मा गाँधी के अधूरे सपने को पूरा किया। दर असल पद्म विभूषण डॉ. विंदेश्वर पाठक जी का जन्म 2 अप्रैल, 1943 को बिहार के वैशाली जिले के रामपुर के बघेल ग...

मिथिला मखाना : परंपरा ,स्वाद और सेहत की अनोखी कहानी

        Gaurav Jha   [WRITER, JOURNALIST & COLUMNIST ] बिहार के मिथिला (Mithila) में एक कहावत काफी मशहूर है- पग-पग पोखरि, माछ-मखान। मिथिला के मखाने अपने स्वाद, पोषक तत्व और प्राकृतिक रूप से उगाए जाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। मिथिला की पावन धरती, जहाँ ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की खुशबू बसती है, वहीं की पहचान है मिथिला मखाना। इसे यूँ ही “तालाबों का सोना” नहीं कहा जाता। सदियों से मखाना मिथिला के किसानों की मेहनत, प्रकृति के वरदान और समृद्ध परंपरा का प्रतीक रहा है।कहा जाता है, मिथिला के तालाबों में सिर्फ पानी नहीं, मेहनत और सपने भी पलते हैं। कांटों से भरे गहरे पानी में उतरकर किसान मखाने के बीज निकालते हैं। यह सिर्फ खेती नहीं, पीढ़ियों से चली आ रही एक विरासत है। हर दाना किसानों की मेहनत और मिथिला की मिट्टी की कहानी कहता है।               लिहाज़ा भारत के 90% मखानों का उत्पादन यहीं से होता है। मिथिला का मखाना अपनी गुणवत्ता,स्वादिष्ट पोषक तत्व और औषधीय गुणों के कारण देश और विदेशों मे...