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कविता:-- आओ मिलकर क़दम बढ़ाएँ।।

अपने पावन मातृभूमि को हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी हमेशा क़दम बढ़ाना है।
अपने भारत को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए,
मातृभूमि के खातिर जनवासी को बीड़ा उठाना है।

अपने पावन मातृभूमि को हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी हमेशा क़दम बढ़ाना है।।

मिलेगें एकजुट होकर तब देश हमारा स्वच्छ होगा,
जन-जन भारतवासी सब रोज़  तभी स्वस्थ होगा।
आओं मिलकर  जन-जन को यही बात समझाना है।
अपने इस पुण्य धरा के बारे में सबको कुछ बताना है।

अपने पावन मातृभूमि को हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ बढ़ाना है।।

सुख-समृद्धि, खुशियां अगर अपने घर-घर लाना है,
आओ मिलकर प्रण करें सब भारत को ऊंचा उठाना है।
स्वस्थ रहेंगे सभी इस भूमि पर तब पेड़-पौधे, पशु-पक्षी,
हर मानवजाति यही बात सबको हमें  ज़रा  कहना है।।

अपने पावन मातृभूमि को रोज़ हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ ज़रा बढ़ाना है।।

अपने देश की गंगा, यमुना,ब्रह्मपुत्र आदि नदियों को
आओ मिलकर हम सबको इसे रोज़  चमकाना है,
दिन-प्रतिदिन मलीन होने से  हम सबको बचाना है।
स्वच्छ रहेगा  भारत यही बात दुनिया को बताना है।।

अपने पावन मातृभूमि को रोज़ हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ ज़रा बढ़ाना है।।

देश का विकास करके जग में उन्नति हमें बढ़ाना है,
अपने राष्ट्र को मिलकर हम सबको ही तो बचाना है।।
दिलों में सदा मानवता को अपनाकर अपने देश के
विकास में हम सबको मिलकर ज़रा क़दम बढ़ाना है।।

अपने पावन मातृभूमि को रोज़ हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ ज़रा बढ़ाना है।।

हर बुराई को दूर करके सदा आतंकवाद को हमें मिटाना है,
अपने इस सुंदर और सौंधी मिट्टी को सभी को स्वर्ग बनाना है
सत्य,अहिंसा,और धर्म के मार्ग पर चलकर  सभी को सदा,
इस सुंदर और सौंधी मिट्टी को हम सबको स्वर्ग बनाना है,
एकजुट होकर प्रेम से  फिर से भारत को विश्वगुरु बनाना है।।

अपने पावन मातृभूमि को रोज़ हमें स्वच्छ बनाना है,
ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ ज़रा बढ़ाना है।।

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